Happy Dipawali

                      दीपों का पर्व-दीपवाली
हमारा देश अनेक धर्म,संप्रदायों,जातियों का अद्भुत संगम है। यहां के निवासी अपने बिस्वास एवं रुचियों के अनुसार अपने-अपने त्योहार हर्सोल्लास के साथ मनाते हैं। दीपावली भी भारतीयों द्वारा मनाए जाने वाला एक महत्वपूर्ण पर्व हैं।दीपावली दो शब्दों से मिलकर बना है-दीप+अवली अथार्थ दीपो की पंक्ति।इस दिन दीप जलाने का विशेष महत्व है इसलिए इस दिन रात को दीप जलाकर प्रकाश किया जाता है,अत: दीपावली प्रकाश पर्व है। दीपावली का पर्व प्रति वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। अगर देखा जाए तो दीपावली कई पर्वो का समूह है। दीपावली से पूर्व छोटी दीपावली और उससे पूर्व धनतेरस का पर्व होता है।
दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा और उससे अगले दिन भाईदूज का त्योहार होता है।
इस प्रकार दीपावली के समय सप्ताह पर्यंत हर्सोल्लास का वातावरण बना रहता है। दीपावली के रात्रि में लक्ष्मी पूजन किया जाता है,दीपक या विद्युत दीप जलाकर रोशनी की जाती है। बच्चे आतिस्बाजी चलाकर प्रसन्न होते है।लक्ष्मी पूजन के उपरांत व्यापारीगण अपने नए बही खाते प्रारंभ करते हैं। दीपावली के कई दिन पहले ही लक्ष्मी आगमन के लिए तैयारी प्रारंभ हो जाती है।लोग अपने घर की सफाई करते हैं।उन्हें यथा संभव सजाते है।सफाई एवं सुद्धता के वातावरण में जब दीपकों का प्रकाश किया जाता है तो अमावस्या कि काली रात्रि भी पूर्णिमा में परिवर्तित हो जाती है। बाजारों में दुकानों कि सजावट देखते ही बनती है।इस अवसर पर लोग अपने मित्रों के यहां मिष्ठान एवम् उपहार प्रदान करके प्रेम एवम् सौहार्द बढ़ाते है। दीपावली का पौराणिक एवम् ऐतिहासिक दृष्टि से भी विशेष महत्व है।एक ऐतिहासिक घटना के अनुसार,इसी दिन भगवान श्रीराम लंका के राजा रावण को मारकर सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या वापस आए थे। उनके अयोध्या वापस आने के खुसी में अयोध्यावासियों ने दीपकों की पंक्तियां जल प्रकाश किया।तभी से इस दिन दीपकों की पंक्तियां जलाने का महत्तव है।इसी दिन सिखों के छठे गुरु गोविंद सिंह जी की बंधन मुक्ति हुई थी। आर्य समाज के प्रवर्तक स्वामी दयानंद,जैन तीर्थंकर ने भी इसी दिन निर्वाण प्राप्त किया था। प्रकाश पर्व दीपावली हमें जीवन भर हर्सोल्लास से रहने की प्रेरणा देती है। हमारे जीवन में सदैव ज्ञान का प्रकाश जगमगाता रहे,परंतु इस प्रकाश पर्व के दिन कुछ लोग जुआ खेलते है,यह कानूनी अपराध है।कभी-कभी आतिशबाज़ी से आग लगने की दुर्घटनाएं हो जाती हैं। आतिशबाज़ी से ध्वनि प्रदूषण तथा वायु प्रदूषण फैलता है। अत:आतिशबाज़ी का विरोध करके प्रदूषण रहित दीपावली मनाना ही दीपावली की पवित्रता का परिचायक है।
रत की सबसे पुरानी त्योहार है पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन बुराई पर अच्छाई की जीत हुई थी ।दोस्तो यह त्योहार पांच दिनों का होता है।
पहले दिन धनतेरस
दूसरे दिन छोटी दीपावली
तीसरे दिन बड़ी दीपावली
चौथे दिन गोवर्धन पूजा
पांचवे दिन भाई दूज
                          और इसी के साथ मै आप सभी को इन                   त्योहारों की हार्दिक शुभकमनाएं देता हूं।

Comments